Inspirational

एशियन पेंट्स की सफलता की कहानी – Asian Paints Success Story in Hindi

Asian Paints Success Story in Hindi
Written by Hindi FAQ Team
-विज्ञापन-

Topic : Asian Paints Success Story in Hindi.

नमस्कार HindiFAQ.com में आप सभी का स्वागत है| आज हम अपने इस लेख मे एशियन पेंट्स की सफलता की कहानी बताएँगे साथ हो जानेंगे की कैसे शुरू हुई एशियन पेंट कंपनी, कैसे एशियन पेंट्स कंपनी की ग्रौथ हुई और कैसे “Asian Paints Company” पिछले कई सालो से “Paint Industry” पर राज कर रही है.

इस लेख में आपको असली बिज़नस स्किल्स और रणनीतियों के बारे मे पता चलेगा की हमे सक्सेसफुल बिज़नस के लिए हमे किस तरह छोटी-छोटी बातों पर ध्यान रखकर और कुछ अलग सोचकर कैसे रणनीतिया बनानी पड़ती है.

इस पूरे लेख मे आपको यह भी पता चलेगा की ‘As A Investment’ आपका विश्लेषण कितना गहरा होना चाहिए|

तो आज आपको इस लेख से बहुत सारे Business Lessons और Investing Lessons सिखने को मिलेंगे|

Asian Paints Success Story in Hindi

Basic information ⇓

                                 एशियन पेंट्स लिमिटेड (Basic information )
प्रकार पब्लिक कंपनी
वयापार BSE : 500820
NSE : Asian Paints
उधोगरसायन
स्थापना1942
मुख्यालयमुंबई, महाराष्ट्र, भारत
क्षेत्रदुनिया भर
उत्पादमूल और औद्योगिक रसायन, सजावटी रंग,
राजस्व15,852 करोड़ (US$2.31 बिलियन)(2016)
 ऑपरेटिंग इंकम2,808 करोड़ (US$409.97 मिलियन)(2016)
 

-विज्ञापन-

नेट इंकम

1,779 करोड़ (US$259.73 मिलियन)(2016)
कुल संपत्ति6,205 करोड़ (US$905.93 मिलियन)(2016)
कर्मचारी6,067 (in 2016)
वेबसाइटAsianpaints.com

एशियन पेंट्स की जानकारी – एशियन पेंट्स की शुरुआत कैसे हुई ?

वर्ल्ड वार-2 से पहले इंडिया की पैंट इंडस्ट्री मे कुछ इंडियन कंपनीस थी, और कुछ बाहरी कंपनीस थी, दूसरे विश्वयुद्ध के समय मे इंडिया के पैंट के इम्पोर्ट पर रोक लगा दी थी, जिससे इंडियन कंपनी को पैंट इंडस्ट्री में अच्छी Opportunity मिली|

इस Opportunity को देख कर 26साल के मिस्टर चम्पक लाल चोकसी ने अपने तीन दोस्तो के साथ मिलकर 1942 मे मुंबई मे Asian Paints नाम की कंपनी शुरू की|

मिस्टर चम्पक लाल चोकसी पैंट का कंसप्शन ट्रेंड पता करने मे माहिर थे, और फिर उन ट्रेंड्स और पैटर्न के अनुसार वो स्ट्रैर्जिस बनाते थे, इस तरह स्ट्रैर्जिस बनाने पर और उन स्ट्रैर्जिस को इम्प्रूव करने पर वो काम करते थे|

उन्होने शुरुआत डेकोरेटीव पेंट से की तब डेकोरेटीव पेंट के लिए सब जगह चुना इस्तेमाल किया जाता था, तो मिस्टर चोकसी के सामने पहली चुनोती यह थी की Asian Paints को एक ब्रांड के तोर पर कैसे खड़ा किया जाए और उसके लिए उन्हे पैंट डिस्ट्रीबूटेर्स का साथ चाहिए था| पर बड़ी सिटि के डिस्ट्रीबूटेर्स ने उन्हे इग्नोर किया, पैंट इंडस्ट्री मे डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क बहुत ज्यादा जरूरी होता है|

उसके बाद भी मिस्टर चोकसी के जुनून मे कोई कमी नही आई, उसके बाद वो ग्रामीण एरिया मे चले गाए, उन्होने अपनी पहली डिस्ट्रीबूटेरशिप महाराष्ट्र के सांगली मे खोली जो की तब एक छोटा सा गाव था|

छोटी सिटी के दुकानदारो को डिस्ट्रीबूटेरशिप के बजाए सीधे कंपनी से जुडने मे गर्व महसूस होता था, और उन्हे पैंट अच्छे दाम मे भी मिल जाता था, मिस्टर चोकसी पैंट के कंसप्शन पैटर्न को कैसे एनालेसिस करते थे, और कैसे उसके लिए बेहतरीन स्ट्रेटेजीज बनाते थे, यह आपको नीचे दिये गए उदाहरण से पता चलेगा.

Asian Paints Success Story in Hindi – Interesting Facts About Asian Paints in Hindi

पोंगल जो की तमिलनाडू मे मनाया जाता है, और पोला जो की महाराष्ट्र मे मनाया जाता है, इन दो त्योहारो मे लोग बैल की पुजा करते है.

मिस्टर चोकसी ने अब्ज़र्व किया की इन त्योहारो मे बैल के सिग को पैंट करने के लिए पैंट की अच्छी डिमांड होती है, जिसके लिए ब्राइट पैंट की जरूरत होती है, और वो भी कम मात्रा में| उन्होने यह भी निरीक्षण किया की बैल अपने सिंग कीचड़ मे डाल देते है, इसलिए पैंट की क्वालिटी लॉन्ग लास्टिंग होनी चाहिए|

उन्होंने इस यूनिक अवसर को देखा और उसमे उत्तर गए, इस अवसर को प्राप्त करने के लिए उन्होने ब्राइट पैंट के छोटे-छोटे डिब्बे लॉंच किए अपने इस प्लान मे Asian Paints को बहुत अच्छी सफलता मिली|

-विज्ञापन-

मिस्टर चोकसी छोटी-छोटी चीजों का गेहराई से विश्लेषण करके उसकी मांग पता करते थे, और उसके अनुसार प्रोडक्टस लॉंच करते थे, वो कहा करते थे की गरीब अपनी दहलीज़ जरूर रंग करेगा पूरा घर चाहे ना करे, और फिर वो उनके हिसाब से प्रोडक्टस बनाते थे|

इसलिय कहते है की जो कोई भी बिज़नस आप करना चाहते हो या जिस बिज़नस मे आप इन्वेस्ट करना चाहते हो उसकी गहरी समझ आपको होनी चाहिए|

जैसे जैसे Asian paints की मांग बढ़ने लगी बड़ी सिटी के डिस्ट्रीबूटेर्स जो पहले Asian paints के प्रोडक्टस बेचना नही चाहते थे, वो कंपनी के पास डिस्ट्रीबूटेरशिप के लिए आने लगे|

मिस्टर चोकसी ने नोटिस किया चुना जो है वो दीवार से निकल जाता है और कपड़ो पर चिपक जाता है, वही प्लास्टिक इमर्शन जिसे जेनसेन एंड निकोलसन ने लॉंच किया था, उसमे यह सारे समस्या नही थी, पर वो चुने से पाच गुना महंगा था, जिसकी डबल्यूजेएच से लोग उसे अफ़्फोर्ड नही कर पा रहे थे|

अपना काम चुने से ही चला रहे थे, तो इस गैप को मिस्टर चोकसी ने नोटिस किया और 1950 मे Asian paint ने Washable Distemper लॉंच किया, जो की चुना और प्लास्टिक इमर्शन के बीच का प्रॉडक्ट था, Asian paints का यह प्रॉडक्ट आगे चलकर बहुत ज्यादा कामयाब हुआ|

इन सब सक्सेस के चलते 1967 मे Asian Paints इंडिया की सबसे बड़ी पैंट कंपनी बन गयी|

Asian paint इंडिया की सबसे बड़ी कंपनी बनने के बाद मिस्टर चोकसी को अहसास हुआ की कंपनी का ऑप्रेशन और बड़ाने के लिए अब कंपनी को बाहर के टैलंट की जरूरत है यानी मिस्टर चोकसी और उनके तीन दोस्तो की बिज़नस फैमली के अलावा कंपनी मे बाहर के टैलंट को हायर करना जरूरी है.

कंपनी अच्छे कॉलेजो से टैलेंटेड लोगो को हायर करने लगी, कंपनी का यह फ़ैसला बहुत फायदेमंद साबित हुआ, कंपनी ने 1970-1980 मे हायर किए हुए बहुत सारे लोग आज भी कंपनी के साथ है, उनमे से ही एक मिस्टर K.B.S. Anand (Ceo, Asian Paints) शुरुआत से ही Asian paint ने टेक्नोलोजी पर फोकस रखा|

कंपनी ने 1974 के करीब पहला मेन फ्लुएंट कंप्यूटर खरीदा था, उस समय बहुत ही कम कंपनी के पास मेन फ्लुएंट कंप्यूटर था और बाकी कंपनी पैरोल और एड्मिनिसट्रेशन प्रोसेस के लिए इस्तेमाल करते थे, वही एशियाई पेंट टेक्नोलॉजी मे एक कदम आगे थे|

वो मेन फ्लुएंट कंप्यूटर का उपयोग पैंट की डिमांड पता करने के लिए और उसका अंदाजा पता लगाने के लिए इस्तेमाल करते थे ताकि उस मात्रा मे वो पैंट बना सके और अपनी इन्वेंटरी को बड़िया तरीके से मैनेज कर सके|

इस तरह डेटा विश्लेषणात्मक की मदद से ग्रो हो के उन्होने अपने प्रतियोगियो को बहुत पीछे छोड़ दिया|

Asian paints ने अपने कौर बिज़नस पर हमेशा फोकस बनाए रखा, जबकि कंपनी का प्रतियोगी जेन्स्न एंड निकोल्स्न अलग अलग बिज़नस जैसे की Hotel, Financial Services, Weighting Machines इनके बिज़नस मे विविधता होता चला गया, और इस प्रक्रिया मे उसका ध्यान पैंट इंडस्ट्री से हट गया और पैंट इंडस्ट्री मे उनका मार्केट शेर लगातार घटता चला गया|

Asian paint के सक्सेस मे इनोवेशन का बहुत बड़ा रोल है, कंपनी डिमांड के अनुसार नयी प्रॉडक्ट रेंज लौंच करती आई है, कंपनी ने हमेशा पेशेवरो को काम करने की आजादी दी है|

जेबी कंपनी के प्रमोटर्स मिस्टर चोकसी और उनके तीन फ्रेंड्स की फॅमिली की 2nd पीढ़ी जब Asian Paints मे आई तब उन्हे साफ तोर पर यह कह दिया गया की वो पेशेवरो के काम मे दखल अंदाजी ना करे, साथ ही कंपनी ने अपना डीलर नेटवर्क मजबूत बनाया|

कंपनी की इस पूरी जरनी मे इफेक्टिव अद्वेर्तिस्मेंट की मदद से कंपनी ने लोगो के दीमाग मे यह फिक्स कर दिया की पैंट मतलब Asian Paints इस तरह डिमांड्स के अनुसार रणनीतिया बनाकर नवोन्मेष और तकनीकी का इस्तेमाल करके पेशेवरो को हायर करके इफेक्टिव अद्वेर्तिस्मेंट, और इफेक्टिव सप्लाइ चैन मैनेजमेंट इन सारे फक्त्र्स ने मिलकर Asian Paints को एक सक्सेस स्टोरी बना दिया.

इण्डिया की सबसे बड़ी पैंट कंपनी बनना तो बड़ा काम है ही तो फिर भी पचास से जायदा सालो से अपनी नंबर वन पोजीशन बनाए रखना अपने आप मे एक बहुत बड़ी बात है।

1991 से Asian Paints की शेर प्राइस (25% Compounded Annual Returns) से बड रही है, 1991 मे Asian Paints मे इन्वेस्ट किए हुए 1,00,000 की कीमत आज 30,000,000 है|

तो दोस्तों मैं उम्मीद करता हूँ की आपको Asian Paints Success Story in Hindi Language में पढ़ कर अच्छा लगा होगा| आपको इनकी सफलता की कहानी कैसी लगी हमको कमेंट के माध्यम से अवश्य बताये.

About the author

Hindi FAQ Team

Hindi FAQ में आप सभी का हार्दिक स्वागत है| यह एक हिंदी टेक ब्लॉग है जहाँ पर आपको टेक के बारे में बताया जाएगा| अगर आपको किसी भी विषय के बारे में जानना है तो आप कमेंट के माध्यम से अपना प्रशन पूछ सकते हो|

Leave a Comment